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घड़ी जिसमें कल बंद था

जब समय रुकता है, जीवन चलना सीखता है।

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Author: Pradeep Singh
Narrator: SochPage AI Narrator – Warm Reflective Male Voice
Duration: N/A
Language: Hindi
Category: General
Format: Audiobook

Short Description

एक आदमी की विरासत में मिली घड़ी सही समय बताती है — पर कभी “कल” नहीं आने देती।
जब भविष्य रुक जाता है, वह पहली बार वर्तमान को जीना सीखता है।
यह कहानी समय, स्मृति और स्वीकार की एक गहरी, शांत यात्रा है।

About this Audiobook

अनिरुद्ध की कलाई पर बंधी पुरानी घड़ी में एक अजीब कमी है — वह समय तो सही बताती है, पर तारीख़ कभी आगे नहीं बढ़ती। उसके जीवन में “कल” रुक जाता है, और “आज” अंतहीन हो जाता है।

शुरुआत में वह इसे तकनीकी खराबी समझता है, फिर धीरे-धीरे उसे एहसास होता है कि समस्या घड़ी में नहीं, उसके जीने के तरीके में है। भविष्य की योजनाओं और अतीत की स्मृतियों के बीच फँसा अनिरुद्ध पहली बार वर्तमान की शांति, ठहराव और अर्थ को महसूस करता है।

एक पुरानी घड़ी, एक अप्रत्याशित ठहराव, और कुछ साधारण मुलाक़ातें — इन्हीं के बीच वह सीखता है कि समय को पकड़ा नहीं जाता, जिया जाता है।

यह कहानी हमें याद दिलाती है:

जीवन भविष्य में नहीं, इस क्षण में घटता है

ठहरना हार नहीं, समझ की शुरुआत है

जब हम आज को स्वीकार करते हैं, कल स्वयं लौट आता है

“घड़ी जिसमें कल बंद था” समय, चेतना और आत्म-स्वीकृति की एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक यात्रा है — सुनने के बाद श्रोता कुछ देर चुप रहना चाहेंगे।

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